तेरी तस्वीर के दो पहलु हैं
कुछ तू जानता हैं कुछ मैं पहचानती हूँ
कभी तू ग़म हैं कभी तुझीमें खुशिया हैं ,
कभी अनजान हैं तू मुझसे पर मैं तुझी को जान'ना चाहती हूँ
कभी दुनिया से नाराज़ तो कभी मेरी दुनिया मुझसे
कभी तुझसे बहोत दूर जाना चाहती हूँ कभी बस तेरे करीब रहना
कुछ पागल सी हूँ कुछ समझदार भी..
कभी सिर्फ तुझे याद रखना चाहती हु कभी बस तुझे भुलाना ....
तू दर्द हैं कभी , तो कभी तुही सुकून हैं !
तेरे साथ रह भी नहीं सकती और तुझे छोड़ना मुमकिन भी नहीं
तू कल भी कशमकश था आज भी हैं .....
अर्चना शर्मा
कुछ तू जानता हैं कुछ मैं पहचानती हूँ
कभी तू ग़म हैं कभी तुझीमें खुशिया हैं ,
कभी अनजान हैं तू मुझसे पर मैं तुझी को जान'ना चाहती हूँ
कभी दुनिया से नाराज़ तो कभी मेरी दुनिया मुझसे
कभी तुझसे बहोत दूर जाना चाहती हूँ कभी बस तेरे करीब रहना
कुछ पागल सी हूँ कुछ समझदार भी..
कभी सिर्फ तुझे याद रखना चाहती हु कभी बस तुझे भुलाना ....
तू दर्द हैं कभी , तो कभी तुही सुकून हैं !
तेरे साथ रह भी नहीं सकती और तुझे छोड़ना मुमकिन भी नहीं
तू कल भी कशमकश था आज भी हैं .....
अर्चना शर्मा
Awesome lines
ReplyDeleteAwesome lines
ReplyDeleteSushant i am happy you spent time to read it, possibly read whole post and if you like then comment thanks dear...
ReplyDeleteMera jindgi tumse hai, wonderful feelings
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