Thursday, October 24, 2013

पुरी हु मैं कुछ अधूरे ख्वाबों के साथ


पूरी हूँ, मैं कुछ अधूरे से ख्वाबों के साथ,
अधूरी हु मैं किसीके अधूरे वादे के साथ,
चलते थे साथ जो कभी पीछे छुट गये ,
मेरे अपने शीशे की तरह गिरके टूट गये,
अक्सर समेत लेती हु उनको,
बिखरे से रिश्ते नातों के साथ ,
पूरी हूँ मैं कुछ अधूरे से ख्वाबों के साथ....

दफन हैं ज़िन्दगी

ज़हन में दफन हैं ज़िन्दगी जिसकी याद बनकर,
हम तो हर पल मरते हैं उनकी मुलाक़ात के लिए ,
मौत क मंज़र तो फिर भी झेल लेंगे दोस्तों ,
अब जी नहीं सकते उनके इंतज़ार के लिए !
अर्चना शर्मा 

१२.१२.१२ तो खुशनुमा तारिक थी मेहेज़

12.12.12....shaam kal bhi khushnuma thi aaj bhi rahegi, taarik toh badalti hi rahengi ishwar me maanti hu to bas ek baat kahungi ke mere apno kaa saath naa badale meri duniyaa chhoti hain par behad haseen hain ab mujhe khwaab ke peechhe nahi chalna aur khwahish khud meraa pichha karti hain doston..sukh dukh se to choli daaman ka saath bana hi rahega,
Is sunehri zindgi ki har taarik har pal behad rangeen hain har rang ka ek anootha aanand hain, zindagi ke geet ka har mookhda har antra evam har swar mathur taan ki tarah meetha aur raseela hain, iss meethey aur zara se khattey swaad ka bhi apnaa mazaa hain
Aap bhi ye khushnumaa taarik ka lutf uthaaye aapsabhi ke hontho pe dard ka harf bhi naa aaye
Yahi kaamna karti hu,
ARCHANA SHARMA

राजेश खन्ना का जादु आज भी कायम हैं !

इनका दौर चला गया , फिल्मे भी चली गयी ....पर इसके जादुई अलफ़ाजो का खुमार अब भी कायम हैं ..." बाबूमोशाय" ......

कितने सितारे आये और जुगनू की तरह गायब हो गये 
पर मेरे लिए इनकी रोशनी अब भी उतनी ही नयी हैं जितनी पहले रही
"राजेश खन्ना " वो सितारा हैं , जिसने सदा के लिए आसमान को गले से लगा लिया

पर मेरी तलाश उन सितारों में आज भी हैं ,
दोस्तों आप भी आसमान में तलाशिये तो
सबसे बेहतरीन चमकने वाला सितारा "काका" ही होंगे ...

क्यूंकि आनंद मरते नहीं ??? अपनी कविता को गले से लगते हैं ......


मौत तू एक कविता है,
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको


डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे
ज़र्द सा चेहरा लिये जब चांद उफक तक पहुचे
दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब
ना अंधेरा ना उजाला हो, ना अभी रात ना दिन


जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब साँस आऐ
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको"....

बेइन्तहा मुहब्बत "काका " के लिए .......आपके लिए हमारा "अमर प्रेम "

बस तुमसे प्यार किया


जब भी मैंने अपना हाथ बढाया तुमने मेरा हाथ थामा ,
जब भी मैंने धडकनों में मुहब्बत महसूस की तुम्ही ने उस धड़कन को सुना ,
जब भी ख़ामोशी ने आगोश में लिया वो तुम्हारी बाते थी जिसने हर ख़ामोशी को खामोश किया
हर रंग में देखा तुमने मुझे हर रूप में स्वीकार किया ,
कभी जाने अनजाने लफ़्ज़ों में इज़हार किया ,
तुमने की मुझसे बे-इन्तेहा मुहब्बत ,
मैंने भी तुमसे प्यार किया, तुमसे प्यार किया, बस तुमसे प्यार किया
अर्चना शर्मा 

तरसते लम्हे

Kaash main raat hoti to apne chand ke pas hoti badal banke unpe barsti unki mulakat ke liye harpal tarasti par har pal aaspas hoti
kaash mai raat hotiiiiii.............

Archana Sharma

हर नारी का हो सम्मान


Tu devi hain maa sarashwatiii
tu maa dharti tu hi agni
tu seeta hain tu saavitrii

tu hi hain moorat mamta ki
tuhi hain baali kheto ki
kabhi hain alhad, kabhi manchali....
hain tuhi to maa jagjanani

tu ganga hain tu hain yamuna
tuhi preetam ki priyatama
chand bhi tere mathe shobhit
swarg hain tere pairo me

tu shakti hain tuhi savita
tuhi hain uljhi si kavita

NAARI ko hain pratham pranam
Har NAARI ka ho samman

...............

Meri kavita tujhe samarpit

लोग हँसते हैं !

मुझपे हस्ते हैं वो फूल जो तुमने मेरे बालो में लगाया था ,
हसते हैं ये रास्ते जिनपर साथ चला करते थे तुम ,
हंसता हैं वो बादल जिसकी धुप को तुम हथेली से छाव किया करते थे ,
देखो बारिश की वो बुँदे हंसती हैं जिस'से बचाने को तुम अक्सर मुझसे लिपट जाया करते थे,
अब सर्दिया हो चली तुम्हारे दिए गर्म कपडे भी मजाक उड़ायेंगे ,
बस्ती के वो राहगीर जिन्हें देख तुम हाथ थामा करते थे मुझे चिढाएंगे,
तुम्हारे दिए तोहफे ताना कसने से बाज़ नहीं आते ,
कितनी दूँ आवाज़ तुम मेरे पास नहीं आते ,
अब तो मेरी साँसों ने भी मुझसे बग़ावत की हैं ,
दिल ने मेरे मुझसे, धडकनों के बंद होने की शिकायत की हैं ,
क्या ये शिकायत साँसों के साथ ठहर जायेंगी ,
या किसी दिन तेरे लौट आने की खबर आएगी ?
कहो इस कमबख्त ज़माने को खामोश हो ,
या मुझे खामोश होने की इजाज़त दे ,
नही मिला सकता मेरे महबूब से
तो मुझे रिहाई दे , क़यामत दे, मुझे क़यामत दे ,
मेरे अल्लाह मुझे क़यामत दे ....

बस एक वही ग़ज़ल छुपा ली मैंने जिसमे तेरा नाम छुपा रख्खा था


मुझे पता था तू रोयेगा बहोत ये जान ने के बाद ,
नाही मुक़द्दर मिलते हैं नाही हालात ,
किसीने ये तक कहा के लकीरों में नहीं वो तेरे ,
फिर क्या था यारो बैसाखी का सहारा पक्का था ,
बस एक वही ग़ज़ल......

मुमकिन नहीं


दोंस्तों मेरी ज़िन्दगी में मेहेज़ दो बाते मुमकिन नहीं 
तुझे पाने की तमन्ना 
और तुझे भूल जाने की ख्वाइश ......
अर्चना शर्मा

रो-रोकर खामोश हूँ रो-रोकर खामोश हूँ , फिर से रुलाने आ जाइए ,


मेरे दिल की इजाज़त नहीं


इजाज़त

मेरे दिल की इजाज़त नहीं के तुमसे नफरत करे ,
तुम्हारे दिल की इजाज़त नही की मोहब्बत करे !

श्रृंगार

मैं आईने में क्यों अपना श्रृंगार देखू,
जब तेरी आँखों में सारा संसार देखू ,
मेरी आँखों में तूने देखे इंतज़ार बहुत ,
तेरी आँखों में , मैं सिर्फ प्यार देखू 

वो बेवफा अच्छा लगा

हर तरफ थी लगी भीड़ बा -वफ़ा की,
इक वही था जो बे-वफ़ा अच्छा लगा ,
सब झूठ कहते हैं जानते थे हम ,
उसीके अलफ़ाज़ में शायद सच्चा लगा 
कर दिया उसी वक़त झूठा वायेदा पक्का उसने ,
वो वाएदा हमे ज़रा सा कच्चा लगा 
हर तरफ थी लगी भीड़ बा -वफ़ा की ,
इक वही था जो बे-वफ़ा अच्छा लगा ...
 इक वही था जो बे-वफ़ा अच्छा लगा ,
सब झूठ कहते हैं जानते थे हम ,
उसीके अलफ़ाज़ में शायद सच्चा लगा 
कर दिया उसी वक़त झूठा वायेदा पक्का उसने ,
वो वाएदा हमे ज़रा सा कच्चा लगा 
हर तरफ थी लगी भीड़ बा -वफ़ा की ,
इक वही था जो बे-वफ़ा अच्छा लगा ...

मैंने कहा थोड़े से बदल जाओ, उसने अपनी वफ़ा बदल दी ....


कुछ मेरे कुछ तुम्हारे पास, पहली मुलाक़ात में तुमने जो दिया था वो गुलाब मेरे पास रखा हैं , तुमने मेरी कलाई थी जब मोड़ी टूट गयी थी मेरी चूड़ी, आधी मेरे पास आधी तुम्हारे पास , बहुत लड़ी थी मैं तुमसे फाड़ दिया था ख़त तुम्हारा, आधा तुम्हारे पास आधा मेरे पास , उस हवा के झोंके से गिरा हुआ वो पत्ता तुमपर , सौंप दिया मेरे आँचल में , वो सुखा पत्ता पुरज़ा - पुरजा , कुछ मेरे पास कुछ तुम्हारे पास , मेरी पायल में दो घुंघरू थे इक टूट गया था पगडंडी पर , पायल के साथ लगा वो घुंघरू, एक रखा हैं मेरे पास शायद एक तुम्हारे पास , बिस्तर के इक छोर पे शायद , कही गिरी थी मेरी बिंदिया , ढूंढा बहुत था हम-दोनो ने , शायद हो रखा तुम्हारे पास , बची हुई यादे कुछ कल की, ............कुछ मेरे कुछ तुम्हारे पास,




दोस्ती को क्यूँ प्यार का नाम दे ? क्यूँ प्यार को कहे दोस्ती , उसने तो नाही दोस्ती की हमसे ना ही दुश्मनी करने पे मजबूर किया अर्चना शर्मा


आओ दो जज़्बात बांटे खुशियाँ तुम्हारी गम हमारा , आसमान में चलके सितारे बांटे , शब हमारी दिन तुम्हारा , आओ मौसम बांटे बरसते बादल तुम्हारे पतझड़ हमारा, आओ प्यार बांटे बस इक तुम मेरे , बाकी सबकुछ तुम्हारा !! प्यार देने का नाम हैं ...........अर्चना शर्मा


सोच और सवाल (जिनके जवाब सिर्फ जीने में हैं )

सोच और सवाल (जिनके जवाब सिर्फ जीने में हैं ) सोचती हूँ , बहुत सोचती हूँ , कभी आसमान में बनती कुछ अजीबों - गरीब तस्वीरें हैं वो किस चित्रकार ने बनाई , ये परिंदे आसमान में मीलों मिल उड़ कर क्या ढूढते हैं , फिर रत के लौट'ने से पहले कहा छुप जाते हैं , जुगनू को किसकी तलाश हैं , ये नदिया शोर करके किसे पुकारती हैं , क्या कहना चाहती हैं हवा हमारे कानो में , क्या बांसुरी से निकले मधुर संगीत बांसुरी वादक के मन का राग होता हैं , मंदिर की घंटियों का स्वर हिमालय की चोटी तक पहुचता तो होगा ना , क्या बारिश की बुँदे सच में किसीके आंसू हैं खेतो की बालिया क्यों इतना इठलाती हैं ? चंदा को कौन जगाता हैं , ये सूरज किसको ढूढने जाता हैं , फूल किससे बतियाते हैं ? गाँव की पगडंडी क्यूँ इतनी बलखाती हैं क्यूँ गाँव की गोरी घड़े को सर पे क्यूँ रखती हैं ,क्यों हर दुल्हन घूँघट के अन्दर शर्माती हैं .... हल्की सी आंधी धुंदली क्यूँ हो जाती हैं , फिर खेतो की आवाज़ क संगीत क्यूँ बन जाता हैं , आम के पेड़ से फल गिर जाता हैं , मेरे गाँव क पुराना कुआँ जिसका पानी आज भी मीठा कैसे हैं , कैसे गाँव की छत पे ठंडी- प्यारी सी नींद अपने पास बुलाती हैं .... ये कुछ सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब मैं कभी नहीं जानना चाहती बस जीना चाहती हूँ , खुश हु इस प्रक्रति के सवालो में ....

अर्चना शर्मा