Thursday, October 24, 2013
कुछ मेरे कुछ तुम्हारे पास, पहली मुलाक़ात में तुमने जो दिया था वो गुलाब मेरे पास रखा हैं , तुमने मेरी कलाई थी जब मोड़ी टूट गयी थी मेरी चूड़ी, आधी मेरे पास आधी तुम्हारे पास , बहुत लड़ी थी मैं तुमसे फाड़ दिया था ख़त तुम्हारा, आधा तुम्हारे पास आधा मेरे पास , उस हवा के झोंके से गिरा हुआ वो पत्ता तुमपर , सौंप दिया मेरे आँचल में , वो सुखा पत्ता पुरज़ा - पुरजा , कुछ मेरे पास कुछ तुम्हारे पास , मेरी पायल में दो घुंघरू थे इक टूट गया था पगडंडी पर , पायल के साथ लगा वो घुंघरू, एक रखा हैं मेरे पास शायद एक तुम्हारे पास , बिस्तर के इक छोर पे शायद , कही गिरी थी मेरी बिंदिया , ढूंढा बहुत था हम-दोनो ने , शायद हो रखा तुम्हारे पास , बची हुई यादे कुछ कल की, ............कुछ मेरे कुछ तुम्हारे पास,
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