Thursday, October 24, 2013

सोच और सवाल (जिनके जवाब सिर्फ जीने में हैं )

सोच और सवाल (जिनके जवाब सिर्फ जीने में हैं ) सोचती हूँ , बहुत सोचती हूँ , कभी आसमान में बनती कुछ अजीबों - गरीब तस्वीरें हैं वो किस चित्रकार ने बनाई , ये परिंदे आसमान में मीलों मिल उड़ कर क्या ढूढते हैं , फिर रत के लौट'ने से पहले कहा छुप जाते हैं , जुगनू को किसकी तलाश हैं , ये नदिया शोर करके किसे पुकारती हैं , क्या कहना चाहती हैं हवा हमारे कानो में , क्या बांसुरी से निकले मधुर संगीत बांसुरी वादक के मन का राग होता हैं , मंदिर की घंटियों का स्वर हिमालय की चोटी तक पहुचता तो होगा ना , क्या बारिश की बुँदे सच में किसीके आंसू हैं खेतो की बालिया क्यों इतना इठलाती हैं ? चंदा को कौन जगाता हैं , ये सूरज किसको ढूढने जाता हैं , फूल किससे बतियाते हैं ? गाँव की पगडंडी क्यूँ इतनी बलखाती हैं क्यूँ गाँव की गोरी घड़े को सर पे क्यूँ रखती हैं ,क्यों हर दुल्हन घूँघट के अन्दर शर्माती हैं .... हल्की सी आंधी धुंदली क्यूँ हो जाती हैं , फिर खेतो की आवाज़ क संगीत क्यूँ बन जाता हैं , आम के पेड़ से फल गिर जाता हैं , मेरे गाँव क पुराना कुआँ जिसका पानी आज भी मीठा कैसे हैं , कैसे गाँव की छत पे ठंडी- प्यारी सी नींद अपने पास बुलाती हैं .... ये कुछ सवाल ऐसे हैं जिनका जवाब मैं कभी नहीं जानना चाहती बस जीना चाहती हूँ , खुश हु इस प्रक्रति के सवालो में ....

अर्चना शर्मा

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