बस एक वही ग़ज़ल छुपा ली मैंने जिसमे तेरा नाम छुपा रख्खा था
मुझे पता था तू रोयेगा बहोत ये जान ने के बाद , नाही मुक़द्दर मिलते हैं नाही हालात , किसीने ये तक कहा के लकीरों में नहीं वो तेरे , फिर क्या था यारो बैसाखी का सहारा पक्का था , बस एक वही ग़ज़ल......
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