Thursday, October 24, 2013

राजेश खन्ना का जादु आज भी कायम हैं !

इनका दौर चला गया , फिल्मे भी चली गयी ....पर इसके जादुई अलफ़ाजो का खुमार अब भी कायम हैं ..." बाबूमोशाय" ......

कितने सितारे आये और जुगनू की तरह गायब हो गये 
पर मेरे लिए इनकी रोशनी अब भी उतनी ही नयी हैं जितनी पहले रही
"राजेश खन्ना " वो सितारा हैं , जिसने सदा के लिए आसमान को गले से लगा लिया

पर मेरी तलाश उन सितारों में आज भी हैं ,
दोस्तों आप भी आसमान में तलाशिये तो
सबसे बेहतरीन चमकने वाला सितारा "काका" ही होंगे ...

क्यूंकि आनंद मरते नहीं ??? अपनी कविता को गले से लगते हैं ......


मौत तू एक कविता है,
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको


डूबती नब्ज़ों में जब दर्द को नींद आने लगे
ज़र्द सा चेहरा लिये जब चांद उफक तक पहुचे
दिन अभी पानी में हो, रात किनारे के करीब
ना अंधेरा ना उजाला हो, ना अभी रात ना दिन


जिस्म जब ख़त्म हो और रूह को जब साँस आऐ
मुझसे एक कविता का वादा है मिलेगी मुझको"....

बेइन्तहा मुहब्बत "काका " के लिए .......आपके लिए हमारा "अमर प्रेम "

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