माँ
आज तेरी पुरानी लोरी रात भर
जगाएगी
उदास पलके प्यासी अपनी ही
आंसू पी जायेगी
उड़ते पंछी किसे ढूंढते हैं
, क्या आज तू बता पायेगी
इस हवाओं के झोकों में तेरी
मीठी हंसी कब सुनाएगी
खुद भी आएगी क्या तू माँ ?
या बस याद तेरी आएगी
कहती थी सर्द मौसम हैं आज
शाल पहनकर दफ्तर जाना
भूक लगेगी तो बस घर का खाना
खाना
अब क्या तू गोल परोंठे अपने
हांथो से नहीं बनाएगी?
ना फोन करके पूछेगी “बिटिया
तू कितनी देर में आएगी”
तेरी बाँहों में मेरी राते
घुलती
तेरे कंगन के खनक से नींद
खुलती
जब मैं छोटी थी तो समझती
चाँद को तू माथे पे सजाती हैं
रोज़ रोज़ नयी कहानिया कहा से
लाती ?
आज तेरी आवाज़ कहीं खो गयी
क्यूँ मुझसे इतने जल्दी
जुदा हो गयी
क्या तू छोटी बिटिया को
डोली में नहीं बिठाएगी ?
मुझे दुल्हन सा नहीं सजाएगी
?
क्यूँ विदाई के गीत नहीं
गाएगी ?
बस ...अब तो याद आएगी ना
माँ तू तो नहीं आएगी ?
तडपेगी तू भी बहोत लेकिन
गले से नहीं लगा पाएगी ?
बचपन की वो लोरी आज तो रात
भर जगाएगी
मैं नहीं जानती थी तू किसी
दिन ऐसे सो जाएगी
मम्मा I <3 nbsp="" o:p="" u="">3>
अर्चना शर्मा