Wednesday, October 1, 2014

माँ

माँ 
आज तेरी पुरानी लोरी रात भर जगाएगी
उदास पलके प्यासी अपनी ही आंसू पी जायेगी
उड़ते पंछी किसे ढूंढते हैं , क्या आज तू बता पायेगी
इस हवाओं के झोकों में तेरी मीठी हंसी कब सुनाएगी
खुद भी आएगी क्या तू माँ ?
या बस याद तेरी आएगी
कहती थी सर्द मौसम हैं आज शाल पहनकर दफ्तर जाना
भूक लगेगी तो बस घर का खाना खाना
अब क्या तू गोल परोंठे अपने हांथो से नहीं बनाएगी?
ना फोन करके पूछेगी “बिटिया तू कितनी देर में आएगी”
तेरी बाँहों में मेरी राते घुलती
तेरे कंगन के खनक से नींद खुलती
जब मैं छोटी थी तो समझती चाँद को तू माथे पे सजाती हैं
रोज़ रोज़ नयी कहानिया कहा से लाती ?
आज तेरी आवाज़ कहीं खो गयी
क्यूँ मुझसे इतने जल्दी जुदा हो गयी
क्या तू छोटी बिटिया को डोली में नहीं बिठाएगी ?
मुझे दुल्हन सा नहीं सजाएगी ?
क्यूँ विदाई के गीत नहीं गाएगी ?
बस ...अब तो याद आएगी ना माँ तू तो नहीं आएगी ?
तडपेगी तू भी बहोत लेकिन गले से नहीं लगा पाएगी ?
बचपन की वो लोरी आज तो रात भर जगाएगी
मैं नहीं जानती थी तू किसी दिन ऐसे सो जाएगी

मम्मा I <3 nbsp="" o:p="" u="">
अर्चना शर्मा 

3 comments:

  1. Replies
    1. Maa aap ko shat shat naman hai, you still blessed with mother's grace Archana ji.

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    2. Maa aap ko shat shat naman hai, you still blessed with mother's grace Archana ji.

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