Wednesday, March 5, 2014


कुछ पंक्तिया  "मेरे स्वामी " के लिए ...
मेरे मन में मेरे महादेव की मूरत बसती हैं,
जान के मुझको बांवरी दुनिया हंसती हैं,
मीरा तो थी दीवानी शाम की,
मैं तो हूँ उन्मत्त तेरे नाम की,
सूचि स्नेह समर्पित प्रियवर को,
प्रियतम मेरे, प्रेमपात्र के सागर को,,,
आलिंगन उनको तन मन से
जिनके शीश स्वयं गंगा बरसे,
 "सौहार्द " के इश , हैं कैलाशी,
घट -घट वासी अन्तर्यामी,
भोलेनाथ निराले "मेरे स्वामी ".....भोलेनाथ निराले "मेरे स्वामी "
अर्चना शर्मा

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