मेरा प्रेम शिव हैं ...
जिसके शीश में चन्द्रमा सुशोभित हैं , जिनकी बेसभूषा से 'जीवन' और 'मृत्यु' का बोध होता है | शीश पर गंगा और चंद्र-जीवन एवं कला के दयोत्म है | शरीर पर चिता की भस्म ... जतजूटधारी, सर्प लपेटे, गले मे हड्डियों एवं नरमुंडो की माला और जिसके भूत-प्रेत, पिशाच आदि गण है! मैं उन्ही की उपासक हूँ , उन्ही से मेरा प्रेम हैं मैं पार्वती नहीं पर वो मेरे शिव हैं ,मेरे शिव हैं !
प्रगाढ़ प्रेम की प्रतिमा मेरे शिव मेरे महादेव ............
उनसे ही ये जगत वो ही जगत के पालनहार .......
अर्चना शर्मा
जिसके शीश में चन्द्रमा सुशोभित हैं , जिनकी बेसभूषा से 'जीवन' और 'मृत्यु' का बोध होता है | शीश पर गंगा और चंद्र-जीवन एवं कला के दयोत्म है | शरीर पर चिता की भस्म ... जतजूटधारी, सर्प लपेटे, गले मे हड्डियों एवं नरमुंडो की माला और जिसके भूत-प्रेत, पिशाच आदि गण है! मैं उन्ही की उपासक हूँ , उन्ही से मेरा प्रेम हैं मैं पार्वती नहीं पर वो मेरे शिव हैं ,मेरे शिव हैं !
प्रगाढ़ प्रेम की प्रतिमा मेरे शिव मेरे महादेव ............
उनसे ही ये जगत वो ही जगत के पालनहार .......
अर्चना शर्मा
Om Namah Shivay dost Shiv ki bhakti me rama jeevan hazar janamo se behtar hai
ReplyDeleteVery nicely written ... you have powerful style of writing
ReplyDelete