पहले तो ये बिंदिया घूँघट से उन्हें झाँका करती थी ,
ये चूड़िया कलाइयो में इतराया करती थी ,
मेरी माग में सिन्दुर्री सूरज बिखर के चमकता था ,
काजल मग्न थे पीया के दरस में ,
श्रृंगार से दर्पण की आँख मिचोली थी ,
जब मैं हर शाम मिला करती थी उनसे ,
अब वो बात नहीं हैं ,
नाही मिलन की बेला हैं वो रात नहीं हैं , रात ,
ये रात नहीं बस सियाह अँधेरा हैं ,
टूटा सा हिस्सा , कुछ उनका हैं कुछ मेरा हैं ,
अब मेरे कंगन तडपते हैं उनकी एक मुलाकात के लिए ,
विरह की अग्नि में तडपती हैं पायल हर रात के लिए ,
ये जग झूठा हैं बस तुम ही सच हो मेरे प्राण प्यारे,
सारे जगत से मैंने मुह मोड़ लिया ,
मेरी ये पलकें क्या झूकी,
काजल ने आँखों का साथ छोड़ दिया ,
वह भी क्या बेला थी यह भी क्या बेला हैं
धड़कन की कम्पन अब भी हैं पर “ह्रदय “ अकेला हैं !
वह संग भी हैं पर पास नहीं ,
खुशिया तो हैं पर ख़ुशी का तनिक भी एहसास नहीं ,
ना जाने कब वो दिन आएगा जब “नाथ” मेरे आयेंगे
और पहली “रैना “ होगी “ जब हम जगे रह जायेंगे
फिर से चुनरी लहराएगी , चूडिया इतरायेगी , अंगूठी शर्माएगी,
सारी रात रहूंगी उनकी बाहों में जाने वो “रैना “ कब आएगी
.........................................................................अर्चना
शर्मा

दिल की भावनाओ को बखूबी शब्दों में उतरा है अर्चना जी.......
ReplyDeleteबहोत खूब......बहोत खूब......बहोत खूब......बहोत खूब......
धन्यवाद आपका
ReplyDeleteपोस्ट अच्छी लगी !
ReplyDeleteकविता बहुत सुंदर है.
ReplyDeleteIts really owsummmmne
ReplyDeleteधन्यवाद ! दिल से ....
ReplyDeleteAccha Likha ..Aapne...gehrai hai. Tehraav hai. Shingaar ras mein virah ras Ka atbhut mel
ReplyDeleteThnx manoj jee
Deleteबेहद खूबसूरत
ReplyDeleteधन्यवाद सर्वेश जी
DeleteMindblowing lines
ReplyDeleteAwesome Lines!! You are so talented and creative..I don't have words to express how I feel after reading this..!!
ReplyDeleteWow, archana I am in a state of shock. U r very talented. Infact multi talented
ReplyDeleteBHAHOT KHOOB LIKHA HAI PROUD OF YOU
ReplyDeleteJo bichhre vo tera nahin....
jo tera hai uska hi to hriday basera hai...
tujhse bhinn nahin vo to tere antar me basta hai..
teri kavita me uska hi aksh dikhta hai...