Thursday, October 24, 2013

पुरी हु मैं कुछ अधूरे ख्वाबों के साथ


पूरी हूँ, मैं कुछ अधूरे से ख्वाबों के साथ,
अधूरी हु मैं किसीके अधूरे वादे के साथ,
चलते थे साथ जो कभी पीछे छुट गये ,
मेरे अपने शीशे की तरह गिरके टूट गये,
अक्सर समेत लेती हु उनको,
बिखरे से रिश्ते नातों के साथ ,
पूरी हूँ मैं कुछ अधूरे से ख्वाबों के साथ....

5 comments: